. संस्कृत व्यवहारिक शब्दावली
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संस्कृत व्यवहारिक शब्दावली
नाम पृष्ठ संख्या
1.अन्नवर्ग - अन्नों के नाम ..........01
2.आयुध वर्ग- अस्त्रों शस्त्रों के नाम........ 01
3.कृषि वर्ग ...................................02
4.क्रीडासन वर्ग- खेल सम्बन्धी नाम.............02
5.दिक्काल वर्ग- समय सम्बन्धी नाम..........03
6.देव वर्ग- देवता सम्बन्धी नाम.............03
7.नाट्यवर्ग- नाटक सम्बन्धी नाम.........04
8.पक्षिवर्ग................................04
9.पशुवर्ग - पशुओं के नाम....................05
10.पुर वर्ग....................................06
11.पुष्पवर्ग- फूलों के नाम.......................07
12.पात्राणां नामानि...........................07
13.पानादि, भक्ष्य एवं मिष्ठान्न वर्ग.............08
14.ब्राह्मण वर्ग...............................09
15.प्रसाधन एवं आभूषण वर्ग...............10
16.फलानि-फलों के नाम................11
17.वारि वर्ग, व्योम वर्ग...................12
18.वृक्षानां नामानि – वृक्षों के नाम............13
19.गृह वर्ग....................................14
20.रोग वर्ग..............................15
21.विद्यालय सम्बन्धि शब्दाः..............15
22.वैश्य वर्ग..................................16
23.शरीरस्य अंगानि- शरीर के अंगों के नाम.....17
24.शाकम् – सब्जियों के नाम.............18
25.व्यापार वर्ग.................................19
26.शिल्पसूचक शब्दाः- शिल्पसम्बन्धी.........20
27.शैल वर्ग- पर्वत सम्बन्धी................21
28.वस्त्राणां नामानि – वस्त्रों के नाम..........21
29.सम्बन्ध सूचक शब्दाः..................22
30.सैन्यवर्ग..................23
31.धातु वर्ग...............24
1.अन्नवर्ग - अन्नों के नाम | |
अणुः- बासमती चावल अन्नम्- अन्न आढ़की- अरहर कलायः- मटर कोद्रवः- कोदो गोधूमः-गेहूँ चणकः- चना चणकचूर्णम्- वेसन चूर्णम्- आँटा तण्डुलः- चावल तिलः- तिल द्विदलम्- दाल धान्यम्- धान | प्रियंगुः – बाजरा मसूरः – मसूर माषः – उड़द मिश्रचूर्णम् – मिस्सा आटा मुद् गः – मूँग यवः – जौ यवनालः – ज्वार रसवती- रसोई वनमुद्गः- लोभिया व्रीहिः – धान शस्यम्- अन्न (खेत में विद्यमान) श्यामाकः – सावां सर्षपः – सरसों |
2.आयुध वर्ग- अस्त्रों शस्त्रों के नाम | |
आयुधम् - शास्त्र-अस्त्र आयुधागारम् - शास्त्रागार आहवः- युद्ध कबन्धः- धड़ करबालिका - गुप्ती कारा- जेल कार्मुकम्- धनुष कौक्षेयकः - कृपाण गदा - गदा छुरिका - चाकू जिष्णुः - विजयी तूणीरः - तूणीर | धन्विन् – धनुर्धर प्रहरणम् - शस्त्र प्रासः - भाला वर्मन् - कवच विशिखः - बाण वैजयन्ती - पताका शरव्यम् – लक्ष्य शल्यम् - वर्छी सायुंगीनः - रणकुशल सादिन् - घुड़सवार हस्तिपकः – हाथीवान तोमरः – गँड़ासा |
3.कृषि वर्ग | |
उर्वरा - उपजाऊ ऊषरः – ऊसर कणिशः – बाल कोटिशः - धुर्मुश कृषिः – खेती कृषियन्त्रम् - खैती का औजार कृषीवलः – किसान क्षेत्रम् - खेत खनित्रम् -फावड़ा खनियन्त्रम् - ट्रैक्टर खलम् – खलिहान खाद्यम् – खाद तुषः – भूसी | तोत्त्रम् - चाबुक दात्रम् – दँराती पलालः – पराल फालः – हल की फाल बुसभ् – भूसा मृत्तिका – मिट्टी लाड़्गलम् – हल लोष्टम् – ढेला लोष्टभेदनः –मुँगरी, पटरा वसुधा – पृथ्वी शाद्वलः – शस्य श्यामल सीता – जुती भूमि |
4.क्रीडासन वर्ग- खेल सम्बन्धी नाम | |
आसन्दिका – कुर्सी उपस्करः – फर्नीचर कन्दुकः – गेंद काष्ठपरिष्करः – रैकेट काष्ठमंजूषा – आलमारी काष्ठासनम् – बेंच क्रीडाप्रतियोगिता- मैच क्षेपककन्दुकः – वालीवाल खट्वा – खटिया जालम् – नेट निर्णायकः – रेफरी पत्रिक्रीड़ा – बैटमिंटन | पर्पः – चारों ओर मुड़ने वाली कुर्सी पर्यंङ्कः – सोफा पल्यङ्कः – पलंग पादकन्दुकः – फुटबाल पुस्तकाधानम् – बुकरैंक प्रक्षिप्त- कन्दुक-क्रीडा – टेनिस का खेल फलकम् - मेज मञ्जूषा- संदूक, पेटी यष्टि-क्रीड़ा – हाकी का खेल लेखनपीडम् – डेस्क |
5.दिक्काल वर्ग- समय सम्बन्धी नाम | |
अपराह्नः – तीसरा पहर उदीची – उत्तर कला - मिनट काष्ठा – दिशा घटिका – घड़ी दक्षिणा – दक्षिण दिवसः – दिन दिवा – दिन में नक्तम् – रात में निदाघः – ग्रीष्म ऋतु निशीथः – आधी रात पराह्नः – दोपहर के बाद का समय | पूर्वाह्नः – दोपहर के पहले का समय प्रत्यूषः – प्रातः प्रदोषः – सूर्यास्त समय प्रतीची – पश्चिम प्राची – पूर्व प्रावृष् – वर्षा – काल मध्याह्नः – दोपहर का समय रात्रिन्दिवम् – दिन-रात वादनम् – बजे विकला – सेकेण्ड विभावरी – रात वेला – समय हीरा – घण्टा |
6.देव वर्ग- देवता सम्बन्धी नाम | |
अच्युतः – विष्णु असुरः – राक्षस कृतान्तः – यम कृशानुः – अग्नि त्रयम्बकः – शिव नाकः – स्वर्ग पविः – वज्र पीयूषम् – अमृत पुष्पधन्वन् – कामदेव पौलोमी – इन्द्राणी | प्रचेतस् – वरूण मनुष्यधर्मन – कुबेर मातरिश्वन् – वायु लक्ष्मीः – लक्ष्मी वेधस् – ब्रह्मा शतक्रतुः - इन्द्र शार्वाणी – पार्वती सुरः – देवता सेनानीः – कार्तिकेय |
7.नाट्यवर्ग- नाटक सम्बन्धी नाम | |
अवरोहः – उतार आरोहः – चढ़ाव कोणः – मिजराव जलतरङ्गः – जलतरङ्ग डिण्डिमः – ढिढोरा ढौलकः – ढोलक तन्त्रीकवाद्यम् – पियानो तानपूरः –तानापूरा तारः – तीव्रस्वर तूर्यम् – तुरही दुन्दुभिः – नगाड़ा नवरसाः - नवरस | पटहः – ढोल मञ्जीरम् – मंजीरा मध्यः - मध्यम स्वर मनोहारिवाद्यम् - हारमोनियम् मन्द्रः – कोमल स्वर मुरजः – तबला मुरली – बाँसुरी वादित्रगणः – बैण्ड वीणावाद्यम् – बीनबाजा सप्तस्वराः – सात स्वर सारङ्गी – वायोलिन, सारंगी संज्ञाशंखः – विगुल |
8.पक्षिवर्ग | |
कीरः – तोता कुक्कुटः – मुर्गा कुलायः – घोंसला कौशिकः – उल्लू खञ्जनः – खञ्जन गृध्रः – गिद्ध चकोरः – चकोर चटका – चिड़िया (गौरैया) चक्रवाकः – चकवा चातकः – चातक चाषः – नीलकण्ठ चिल्लः – चील टिट्टिभिः – टिटिहीर तित्तिरः – तीतर दार्वाघाटः - कठफोड़ा | ध्वाङ्क्षः – कौआ परभृतः – कोयल पारावतः – कबूतर बकः – बकुला बर्हिन् - मोर मरालः – हंस लावः – बटेर वर्तकः – बतख वरटा – हंसी शलभः – टिड्डी, पतंगा श्येनः – बाज षट्पदः – भौंरा सरघा - मधुमक्खी सारसः – सारस सारिका – मैना |
9.पशुवर्ग - पशुओं के नाम | |
उष्ट्र‚ क्रमेलकः - ऊट कच्छप: - कछुआ कर्कट: ‚ कुलीरः - केकड़ा श्वान:, कुक्कुर:‚ सारमेयः - कुत्ता सरमा‚ शुनि - कुतिया कंगारुः -कंगारू कर्णजलोका -कनखजूरा शशक: - खरगोश गो, धेनु: - गाय खड्.गी - गैंडा श्रृगाल:‚ गोमायुः - गीदड (सियार) चिक्रोड: -गिलहरी कृकलास: -गिरगिट गोधा - गोह गर्दभ:, रासभ:‚ खरः - गधा अश्व:, सैन्धवम्‚ सप्तिः‚ वाजिन्‚ हयः रथ्यः‚ - घोड़ा मूषक: - चूहा - तरक्षु:, चित्रक: - चीता चित्ररासभ: - चित्तीदार घोड़ा छुछुन्दर: - छछूंदर गृहगोधिका - छिपकली चित्रोष्ट्र - जिराफ मृग:- हिरन | नकुल: - नेवला गवय: - नीलगाय वृषभ: ‚ उक्षन्‚ अनडुह - बैल मर्कट: - बन्दर व्याघ्र:‚ द्वीपिन् - बाघ अजा - बकरी अज: - बकरा वनमनुष्य: - बनमानुष मार्जार:, बिडाल: - बिल्ली भल्लूक: - भालू महिषी - भैस , महिषः भैंसा वृक: - भेंडिया मेष: - भेंड उर्णनाभः‚ तन्तुनाभः‚ लूता - मकड़ी मकर: ‚ नक्रः - मगरमच्छ मत्स्यः‚ मीनः‚ झषः - मछली दर्दुरः‚ भेकः - मेंढक लोमशः - लोमडी सिंह:‚ केसरिन्‚ मृगेन्द्रः‚ हरिः - शेर सूकर:‚ वराहः - सुअर शल्यः - सेही हस्ति, करि, गज: - हाथी तरक्षुः - तेंदुआ जलाश्व: - दरियाई घोड़ा |
10.पुर वर्ग | |
अट्टः – अटारी अन्तः पुरम् – रनिवास अजिरम् – आँगन अलिन्दः – घर के बाहर का चबूतरा आपणः – दूकान उटजः – झोपड़ी उपवेशगृहम् – ड्राइंग रूम कुटी – कुटिया कोटपालिका – कोतवाली गोपुरम्- मुख्यद्वार आमः – गाँव चतुःशालम् – चारों ओर मकान बीच में आँगन चतुष्पथः – चौक, चौराहा चत्वरम् – चबूतरा जनमार्गः – रास्ता त्रिभूमिकः – तिमंजिला द्वारम् – द्वार द्विभूमिकः – दुमंजिला दृढ़मार्गः – पक्की सड़क नगराध्यक्षः – म्युनिसिपल चेयरमैन नगरपालिका – म्युनिसीपैलिटी नगरम् – शहर नगरी – कस्बा | निगमः – कार्पोरेशन निश्रेणिः – सीढ़ी काठ आदि की पथिकालयः – मुसाफिरखाना पुरोद्यानम् – पार्क प्रपा – प्याऊ प्राकारः – परकोटा प्रासाद – महल भवनम् – मकान भाण्डागारम् –स्टोररूम भित्तिः – दीवार भोजन गृहम् – डाइंगरूम मण्डपः – मण्डप महाहट्टः – मण्डी मार्गः – सड़क मृन्मार्गः – कच्ची सड़क रथ्या – चौड़ी सड़क रक्षिस्थानम् – थाना राजमार्गः – मुख्य सड़क वलभी – छज्जा विपणिः – बाजार वीथिका – गली, गैलरी वेदिका – वेदी वृत्तिः – बाड़, घेरा सोपानम् – सीढ़ी स्नानागारम् - बाथरूम निगमाध्यक्षः – मेयर |
11.पुष्पवर्ग- फूलों के नाम | |
इन्दीवरम् – नीलकमल कणिकारः – कनेर कह्लारम् – सफेद कमल कुन्दम् – कुन्द कुमुदम् – श्वेत कमल कुमुदनी – कुमुद की लता कुवलयम् – नीलकमल कोकनदम् – लाल कमल जपापुष्पम् – जवाकुसुम नलिनी – पद्मसमूह नवमालिका – नेवारी | पुण्डरीकम् – सफेद कमल प्रसूनम् – फूल बकुलः – मौलसरी बन्दुकः – दुपहरिया मकरन्दः – पराग मल्लिका – बेला मालती – चमेली यूथिका – जूही शेफालिका – हरसिंगार स्तबकः – गुलदस्ता स्थलपद्मम् – गुलाब |
12.पात्राणां नामानि | |
उखा- सास पैन उदंचनम्- बाल्टी उद्ध्मानम्- स्टोव ऋजीषम् -तवा कटोरम्- कटोरा कसोरिका- कटोरी करकः - लोटा काचघटी- जार (कांच का) काचचषक:- कांच का गिलास कंस: - गिलास घट:, कुम्भ:- घड़ा चमस:- चम्मच चषक: - प्याला चषक:- गिलास | दर्वी- करछुल द्रोणि:, द्रोणी -टब (पानी का ) धिषणा-तसला पिष्ठपचनम् – तई, जलेबी आदि पकाने की वारिधि:- कण्डाल शराव:- प्लेट सन्दंश:- चिमटा स्थालिका, थाली स्थाली - पतीली स्वेदिनी, कटाह:- कडाही हसन्ती- अंगीठी हस्तधावनी, - चिलमची |
13.पानादि, भक्ष्य एवं मिष्ठान्न वर्ग | |
अभ्यूषः – डबलरोटी अवदंशः – चाट कन्दुः – केतली कफघ्नी – कॉफी कूलपी – कुल्फी गुल्यः – टॉफी, मीठी गोली चायम् – चाय चायपात्रम्- चाय का वर्तन, टी पाट चायपानम् – चाय-पानी जलपानम् – जलपान दधिवटकः – दही-बड़ा दालमुद्गः – दालमोट पक्कवटिका – पकौड़ी अपूपः- मालपूआ अमृती – इमरती अवलेहः – चटनी आज्यम् – घी कलाकन्दः – कलाकन्द कान्दविकः – हलवाई किलाटः – खोवा कुण्डली – जलेबी कूर्चिका – रबड़ी कौष्माण्डम् – पेठे की मिठाई कृशरः – खिचड़ी क्षीरम् – दूध गजकः – गजक घृतपूरः – घेवर तक्रम् – मट्ठा दधिकम् – लस्सी दुग्धपूपिका – गुलाबजामुन नवनीतम् – मक्खन पक्कान्नम् – पकवान पर्पटी – पपड़ी पायसम् – खीर पिण्डः – पेड़ा पिष्टिका – कचौड़ी पूपः – पूआ पूपला – फुलकी | पक्कालुः – आलू की टिकिया पिष्टकः – बिस्कुट पिष्टान्नम् – पेस्ट्री पुलाकः – पुलाव भ्रष्टापूपः – टोस्ट लवणान्नम् – नमकीन व्यञ्जनम् – मसाला, मसालेदार पदार्थ सग्धिः – सहभोज सपीतिः – टी-पार्टी समोषः – समोसा सहभोजः – डिनरपार्टी सूत्रकः – नमकीन सेव लप्सिका – हलुआ वाताशः – बतासा शर्करा – शक्कर शर्करापालः – शक्करपारा शष्कुली- खस्ता पूरी शाकः – साग सन्तानिका – मलाई सन्धितम् – अचार सिता – चीनी सूत्रिका – सेंवईं सूपः – दाल संयावः – गुझिया हैमी - बर्फी पूपिका –पराठा पूलिका – पूरी मधुमण्ठः – बालूशाही मधुशीर्षः – खाजा मिष्ठान्नम् – मिठाई मिष्ठपाकः – मुरब्बा मोदकः – लड्डू मोहनभोगः – मोहनभोग यवागूः – लपसी रसगोलः – रसगुल्ला राज्यक्तम् – रायता रोटिका – रोटी |
14.ब्राह्मण वर्ग | |
अग्रजन्मन – ब्राह्मण अध्वरः – यज्ञ अनूचानः – सांगवेदज्ञ अन्तेवासिन् – शिष्य अन्ववायः – वंश आस्थानम् – सभागृह इष्टापूर्तम् – धर्मार्थ यज्ञादि चातुर्वर्ण्यम् – चारों वर्ण नियमः – नियम पौर्णमासः – पूर्णिमा का यज्ञ प्राघुणः – अतिथि, पाहुन मस्करिन् - सन्यासी | यज्वन् – यज्ञकर्ता यमः – यम वाचंयमः – मुनि विपक्षित – विद्वान विश्राणनम् – देना श्रोत्रियः – वेदपाठी सपर्या – पूजा सभासद – सदस्य समावृतः – स्नातक समितिः – समिति संसद – लोकसभा स्थण्डिलम् - चबूतरा |
15.प्रसाधन एवं आभूषण वर्ग | |
अंगुलीयकम् , उर्मिका – अंगूठी अलक्तकः - लाक्षारस आभरणम् – आभूषण उद्वर्तनम् – उबटन एकावली -एक लडी का हार ओष्ठरंजनम् – लिपिस्टिक कंकण: , कंकणम् – कंगन किंकिणी -घुंघरू कज्जलम् – काजल कटक:, आवापक: -पहुँची कटक: -सोने का कड़ा कण्ठाभरणम्, कण्ठिका -कण्ठहार कर्णपूर:, कर्णिका -कनफूल कुण्डलम् -कान की बाली काचवलय:, काचवलयम् -चूडी केयूरम्, अंगदम् -बाजूबंद (ब्रेसलेट) ग्रैवेयकम् –हसुली गन्धतैलम् – इत्र चूर्णकम् – पाउडर छोलिका -नथ तिलकम् – तिलक त्रौटकम् -हाथ का तोड़ा दन्तचूर्णम्- मंजन दन्तधावनम् – ब्रश दन्तपिष्टकम् – टूथपेष्ट | दर्पणः – शीशा नखरंजनम् – नेलपालिश नासापुष्पम् – नाक का फूल नासाभरणम् – नथ, बुलाक नूपुरम् – पाजेब पत्रलखा- पत्रलेखा पादाभरणम् –लच्छा प्रसाधनी – कंघी फेनिलम् – साबुन बिन्दुः – बिन्दी मुकुटम् - मुकुट मुक्तावली -मोती की माला मुद्रिका -अंगूठी (नामांकित) मेखला, कांचि: -करधनी मेन्धिका – मेंहदी रोममार्जनी - ब्रुश ललाटाभरणम् – टिकुली ललाटिका – टीका शरः – क्रीम श्रृंगारधानम् – सिंगार दान श्रृंगारफलकम् – ड्रेसिंग टेबल सिन्दूरम् – सिन्दूर स्रज् – पुष्पमाला हारः – मोती का हार हैमम् - स्नो |
16.फलानि-फलों के नाम | |
आम्रम्‚ रसालः‚ सहकारः -आम द्राक्षाफलम्‚ मृद्वीका अंगूर दाडिमम्- अनार आर्द्रालुः- आडू अनानासम् -अनानास अंजीरम् अंजीर अक्षोटम् अखरोट बीजपूरम्‚ आम्रलम्‚ -अमरूद अमृतफलम् दृढबीजम्‚ आंवला - आमलकम् इमली - तिंतिडीकम्‚ तिंतिडी केला - कदलीफलम् कैंथ - कपित्थ कदम्ब - कदम्बम्‚ नीपः करौंदा – करमर्दकः कत्था - खदिर: कंदमूल - कंदमूलम् कटहल - पनसम् खजूर -खर्जूरम् चकोतरा – मधुकर्कटी जामुन - जम्बूफलम् | तरबूज - कलिंगम् नींबू - निम्बुकम्, जम्बीरम् नारियल – नारिकेलः मौसमी (मुसम्मी) - मातुलुंगम् महुआ – मधूकः मकोय – स्वर्णक्षीरी नासपाती - अमृतफलम् नारियल - नारिकेलम् पपीता - मधुकर्कटी फालसा- बेर - बदरीफलम् बेल - बिल्वम् शरीफा - सीताफलम् शहतूत - सन्तरा - नारंगम् सेब - सेवम् लीची – लीचिका खूबानी - खरबूजा -वृत्तकर्कटी गूलर - उदुम्बरम् चीकू - |
17.वारि वर्ग, व्योम वर्ग | |
अर्णवः – समुद्र आपगा – नदी आर्वतः – भौंर आहावः – हौज, टैंक कच्छपः – कछुआ कर्णधारः – नाविक , खिवैया कर्दम् – कीचड़ कुलीरः – केकड़ा कूलम् – तट तोयम् – जल अवग्रहः – अवृष्टि अवश्यायः – हिम, बर्फ आतपः – धूप आसारः – मूसलाधार वर्षा इन्द्रायुधम् – इन्द्रधनुष उत्तरायणम् – उत्तरायण करकाः – ओले गभस्तिः – किरण ज्योत्सना – चाँदनी दक्षिणयानम् – दक्षिणायन दर्शः – अमावस्या | नक्रः – मगर नौः – नाव पोतः – पानी का जहाज भेकः – मेढक मीनः – मछली वीचिः – तरंग सरस् – तालाब सरसी – झील सैकतम् – रेतीला ह्रदः – बड़ी झील द्वादशराशयः – बारह राशियाँ नक्षत्रम् – नक्षत्र नवग्रहाः – नवग्रह राका – पूर्णिमा वियत् – आकाश वृष्टिः – वर्षा शीकरः – जल- कण सप्तसप्तिः – सूर्य सप्ताहः – सप्ताह सुधांशु- चन्द्रमा सौदामिनी – विद्युत स्तनितम् - मेघगर्जन |
18.वृक्षानां नामानि – वृक्षों के नाम | |
आक – अर्कः आँवला – आमलकः आड़ू – आर्द्रालुः अंजीर – अंजीरः अखरोट – अक्षोटः अंगूर – द्राक्षा‚ मृद्वीका आबनूस – तमालवृद्वाः अमरूद – बीजपूरः अशोक – अशोकः आम – सहकारः‚ रसालः‚ आम्रम् इमली – तिन्तिडीकम् इलाइची – एला कल्पवृक्ष – कल्पवृक्षः कटहल – पनसः कत्था- खादिरः कदम्ब – नीपः करौंदा – करमर्दकः केला – कदली खजूर – खर्जूरम् गूलर – उदुम्बरम् चीकू – चीड़ – भद्रदारुः चन्दन – चन्दनम् चाय – चायम् जामुन – जम्बू ढाक – पलाशः ताड़ – तालवृक्षः तुलसी – तुलसिका देवदारु – देवदारुः‚ देववृक्षः धतूरा – धत्तूरः इन्धनम् – ईंधन करीरः – करील काननम् – वन किसलयम् – कोंपल गुग्गुलः – गूगूल तमालः – आबनूस दारूः – लकड़ी पर्णम् – पत्ता प्रियालः - प्याल भद्रदारूः – चीड़ | नींबू – जम्बीरम् नारियल – नारिकेलः नाशपाती – अमृतफलवृक्षः नींम – निम्बवृक्षः पारिजात – पारिजातः पाकड़ – प्लक्षः पान – ताम्बूलम् पपीता – मधुकर्कटीवृक्षम् पीपल – अश्वत्थः बड़- न्यग्रोधः बरगद – वटवृक्षः महुआ – मधूकः बेल- बिल्वः मुसम्मी – मातुलुंगः मेंहदी – मेन्धिका रीठा- फेनिलः लीची – लीचिका लिसोड़ा – श्लोष्मातकः लौकी- अलाबुः रेंड़ – एरण्डः शीशम – शिंशपा शरीफा – सीताफलवृक्षः सफेदा – साल – सालः संतरा – नारंगम् सेव – सेवम् सर्ज – सर्जः सेमर – शाल्मलिः साखू – हरसिंगार – शेफालिका मूलम् –जड़ वल्लरिः – बौर विटपिनः – वृक्ष व्रततिः – लता वृन्तम् – डंठल श्लेष्मातकः –लिसोड़ा सर्जः – सर्ज सालः –साल का पेड़ सिन्दूरः – बाँझ का पेड़ |
19.गृह वर्ग | |
अर्गलम् – अर्गला अश्मचूर्णम् – सीमेन्ट कपाटम् – किवाड़ कक्षा – कमरा काचः – काँच कीलः – चटकनी कुट्टिमम् – फर्श खर्परः – खपड़ा खर्परावृत्तम् – खपरैल का गवाक्षः – खिड़की छदिः – छत तृणम् – फूस त्रपुः – टीन | त्रपुफलम्- टीन की चद्दर दारूः – लकड़ी नागदन्तः – खूँटी पटलगवाक्षः – स्काईलाइट प्रकोष्ठः – पोर्टिको प्रणालिका – नाली प्रलेपः – प्लास्टर महाकक्षः – हाल लघुकक्षः – कोठरी लौहफलकम् – लोहे की चद्दर वरण्डः – बरामदा स्तम्भः - खम्भा |
20.रोग वर्ग | |
अजीर्णम् – कब्ज अतिसारः – दस्त अर्शस् – बवासीर उपदंशः – गरमी , सिफलिस कासः – खाँसी ज्वरः – बुखार पाण्डुः – पीलिया पक्षावातः – लकवा मारना पिटकः – फोड़ा पिटिका – फुंसी प्रतिश्यायः – जुकाम प्रमेहः – प्रमेह प्रलापकज्वरः – निमोनिया | प्रवाहिका – पेचिस मधुमेहः – बहुमूत्र, डायविटीज मन्थरज्वरः – मोतीझरा रक्तचापः – ब्लडप्रेशर राजयक्ष्मन् – तपेदिक, टीबी वमुथः – कै विद्रधिः – कैन्सर विषमज्वरः – मलेरिया विषूचिका – हैजा शीतज्वरः – इन्फ्लूएंजा, फ्लू शीतला – चेचक संनिपातज्वरः – टाइफाइड |
21.विद्यालय सम्बन्धि शब्दाः | |
अङ्कः- नम्बर अध्यापकः- अध्यापक अध्येता- छात्र अध्येत्री- छात्रा अनुपस्थितः- गैरहाजिर अन्तेवासी – शिष्य अवकाशः – छुट्टी अश्मपट्टिका – स्लेट आचार्यः – शिक्षक उपकुलपतिः – वाइस चांसलर उपशिक्षासंचालकः –डिप्टी डायरेक्टर उपस्थितः – हाजिर कक्षा – क्लास, जमात कलमः – कलम कागदः – कागज कुलपतिः – चांसलर घर्षकः – रबड़ तूलिका - पेन्सिल धारा लेखनी – फाउण्टपेन पत्रम् – कागज पट्टिका – पट्टी परीक्षा – इप्तिहान पत्रावली – फाइल पाठशाला- विद्यालय पाठ्यपुस्तकम् – पाठ्यपुस्तक | प्रधानलिपिकः – हेडक्लर्क प्रबन्धकर्ता- मैनेजर प्रश्नः – सवाल प्रस्तोता – रजिस्ट्रार प्राध्यापकः – प्रोफेसर प्रावरणम् – जिल्द पृष्ठम् – पेज पंजिका – रजिस्टर मन्दधीः – नालायक, मूर्ख मसी – स्याही मसीपात्रम् – दवात मसीशोषः – सोख्ता महाविद्यालयः – कालेज मार्जकः – डस्टर लेखनीमुखम् – निब विद्यालयः – स्कूल विवादः – झगड़ा विश्वविद्यालयः – यूनिवर्सिटी वेष्टनम् –बस्ता श्यामफलकः – ब्लैक बोर्ड सतीर्थ्यः – सहपाठी समयसारिणी – टाइम टेबिल सुलेखः – अच्छा लेख संचालकः – डाइरेक्टर संचिका – कॉपी |
22.वैश्य वर्ग | |
अधमर्णः – कर्जा लेने वाला आपणः – दूकान आपणिकः – दूकानदार उत्तमर्णः – कर्जा देने वाला कुसीदम् – कर्जा देने वाला कुसीदवृत्तिः – साहूकारा , बैंकिंग कुसीदिकः – साहूकार ग्राहक- लेने वाला , गाहक दैनिकपंजिका- रोजनामचा नामानुक्रमणिका – लेखा – बही नाम्नि – उधार खाते | पण्यम् - सामान राशिः – धन रकम ढेर ऋणम् – कर्जा लेखकः – मुनीम वणिजः – वैश्य वणिकपंजिका – बही वाणिज्यम् – व्यापार विक्रयः – विक्री विपणिः – बाजार विक्रेतृ- बेचने वाला वृत्तिः- जीविका संख्यानम् - हिसाब |
23.शरीरस्य अंगानि- शरीर के अंगों के नाम | |
अधरम् - निचले ओंठ अन्त्रम्- आँत अभिषम्- माँस आस्यम्- मुँह उरु- जंघा ओष्ठं- उपरी ओंठ अंगुल्य: अँगुली अँगुष्ठ: - अँगूठा कपोलम् -गाल कनीनिका- पुतली कण्ठ: -गला कफोणिः- कोहनी करभः- कलाई से कनी अँगुली तक कुक्षिः, उदरम् - पेट केशा: , शिरोरूहः -बाल कूर्चम्- दाढ़ी गात्रम्- शरीर गुल्फः- टखना, पैर के जोड़ की हड्डी ग्रीवा- गर्दन घ्राणम्, नासिका- नाक जत्रु- कंधे की हड्डी जानुः- घुटना ठुड्डी - चिबुकम् | जिह्वा, रसना - जीभ दन्ता: - दाँत दन्तपालि - मसूढे पक्ष्म -पलक पृष्ठम्- पीठ पाद:- पैर पलितकेशा: -सफेद बाल भौंह - भ्रू: मुखम्- मुख रुधिरम्- खून रोम- रोएँ लोचनम्- नेत्र ललाटम् -मस्तक वक्षस्थलम्- सीना वसा- चर्बी शिखा- चोटी शिरस्- सिर शिरा- नस शुक्रम्- वीर्य श्मश्रु: – दाढी, मूँछ स्कन्ध: - कन्धा सीमन्तम्- माँग श्रोणिः – कमर हस्त: - हाँथ हृदयम्- हृदय |
24.शाकम् – सब्जियों के नाम | |
अदरक - आर्द्रकम् आलू – आलुः आलू बुखारा - आलुकम् करेला - कारबेल्लम् कांकर - कर्कटी करौंदा - आमलकी ककडी - कर्कटी कोहडा (कद्दू) - कूष्मांड:, तुम्बी कटहल - पनसम् कुंदरू – कुंदरुः खीरा/ककडी - कर्कटी, चर्भटि: गवाक्षी - तिल्लिका गांजर - गृञ्जनम् गोभी - गोजिह्वा गांठ गोभी - कन्दशाकम् चिचिंढा - चौराई - चुकन्दर - पालङ्गशाकः टमाटर - रक्त वृन्तकम् टमाटर - हिण्डीरः टिंडा - टिंडिशः तोरई - कोशातकी, जालिनी धनिया - धान्याकम् नींबू - निम्बुकम् नींबू - जम्बीरफलं नेनुआ - जालिनी परवल - पटोलः पुदीना - अजगन्ध: पालक - पालक्या, पालकी पत्तागोभी - शाकप्रभेदः/हरितम् प्याज - पलाण्डुः फूलगोभी - गोजिह्वा बैंगन - बृन्ताकम्, भन्टाकी | बथुआ - वास्तुकम् भिण्डी - भिण्डिका‚ भिण्डकः, रामकोशातकी भांटा - भण्टाकी मूली - मूलिका, मूलकम् मिर्चा/मिर्ची - मरीचम् मटर - कलायः मेथी - मशरूम – छत्राकम् लौंग- लवङ्गम् लोबिया (बोडा) - वनमुद्गः लौकी - कुम्माण्डः लौकी - अलाबूः लहसुन - लसुनम् लौकी (पेठा) - वृहत्फलम् शकरकंद - शकरकन्दः शिमलामिर्च - महामरीचिका शिमलामिर्च - कटुविरा शलजम् - शिखामूलं, श्वेतकन्दः शतावरी - शतावरी साग - शाकम् सब्जी - शाकम् सेम – शिबिका, सिम्बा सहिजन - सुरजन: सरपुतिया - सरसो – सर्षपः सूरन - सूरण: सोवा – सोंठ - शुंठी सौंफ - मधुरा सिंहाड़ा – श्रृंगाटकम् हल्दी - हरिद्रा हींग - हिंगु: |
25.व्यापार वर्ग | |
अभिकर्तृ- एजेन्ट, आढ़ती अभिकरणम् – आढ़त अर्घः – भाव, रेट अर्घापचितिः –भाव गिरना अर्घोपचितिः – भाव बढ़ना आयकरः – इनकम टेक्स आयातः – बाहर से आना आयातशुल्कम् – आयात पर चुंगी उपहारः – भेंट ऋणम् – उधार करः – टैक्स कितवः – धोखेबाज क्रयः – खरीद तुला – तराजू तोलः – तोल तोलनम् – तोलना निर्यातः – बाहर जाना निर्यातशुल्कम् – निर्यात पर चुंगी | नैष्किकः- टकसालाध्यक्ष न्यासः – धरोहर प्राड्विवाकः – वकील प्रतिभूः – जामिन प्रतिद्वन्दिता – होड़ प्रतिश्रुतिः –प्रतिज्ञा मन्दायनम् – मंदी मुद्रा – सिक्का मूलधनम् – पूँजी मूल्यम् – मूल्य मृत्युपत्रम् – वसीयतनामा विक्रयकरः – सेल्सटैक्स विनियमः – अदल-बदल शणपुटः – बोरा शुल्कम् – कमीशन, दलाली शुल्काजीवः – दलाल शौल्किकः – चुंगी का अध्यक्ष |
26.शिल्पसूचक शब्दाः- शिल्पसम्बन्धी | |
अयसम्- लोहा अयोधनः-हथौड़ी अश्मचूर्णम्- सीमेन्ट आवधिः- वर्मा इष्टकः- ईंट उपक्षुरम्- सेफ्टीरेजर उपहासचित्रम्- कार्टून ऐन्द्रजालिक:, आहितुण्डिक: -मदारी करपत्रम्- आरी कर्तरी- कैंची कंकतकृत् – कंघावाला कर्मकर:, भारवाह: -मजदूर कर्णमलनिस्सारक:-कान का मैल निकालने वाला कर्णधार:, कैवर्त:, नाविक: -मल्लाह कुशीलव: -चारण काचकंकणविक्रेता –चुड़िहार कारु:-शिल्पी कुलिकः- शिल्पिसंघ का अध्यक्ष क्षुरम्- छूरा क्षुरकम्- ब्लेड कृषक:, कृषीबल: - किसान कुम्भकार: - कुम्हार चर्मकार: -चमार चित्रकार: -चित्रकार, पेण्टर जलवाह:, कहार: - कहार डिण्डिम: -ढिढोरा पीटने वाला तन्तुवाय: -जुलाहा | प्रतीहार: -दरवान पादूरञ्जकः- पालिश भस्त्रा- धौंकनी भर्जर:, भृष्टकार: -भडभूजा भ्राष्ट्रम-भाड़ भृत्य:, प्रैष्य:, किंकर: -नौकर मालाकार: -माली यन्त्रम्- मशीन यान्त्रिकः- मिस्त्री, मैकेनिक रंजक: -रंगरेज रजक: -धोबी रसयन्त्रम्- कोल्हू लेपक:, सुधाजीवी -लेप लगानेवाला लौहकार: -लोहार व्रश्चनः- छेनी वर्तिका- ब्रश वेतनम्- वेतन विपणिक:, आपणिक:- दूकानदार वीणावादक:, वैणिक:- सितारिया वंचक: -ठग वामन: -बौना व्याध: -शिकारी शस्त्रमार्ज: -धार धरने वाला शाकविक्रेता – खटिक शिल्पी, कारुक: -कारीगर शिल्पशालः- फैक्टरी श्वपच: -मेहतर |
27.शैल वर्ग- पर्वत सम्बन्धी | |
अद्रिः – पर्वत अद्रिद्रोणी – घाटी अधित्यका – पठार उत्सः – सोता उपत्यका – तराई खानिः – खान गह्वरम् – गुफा ग्रावा – पत्थर | दरीं – दर्रा निकुञ्जः – झाड़ी निर्भरः – पहाड़ी नाला प्रपातः – झरना शिला – चट्टान श्रृङ्गम् – चोटी हिमसरित् – ग्लेशियर (बर्फीला) |
28.धातु वर्ग | |
अभ्रकम्- अभ्रक आयसम्- लोहा इन्द्रनीलः- नीलम कार्तस्वरम्, हाटक- सोना कांस्यम्- कांसा कांस्यकूटः- कसकूट गन्धकः- गन्धक चन्द्रलौहम्- जर्मन सिल्वर ताम्रकम्- ताँबा तुत्थाञ्जनम्- तूतिया निष्कलंकायसम्- स्टेनलेस स्टील पारदः- पारा पीतकम्- हरताल | पीतलम्- पीतल पुष्परागः- पुखराज प्रवालम्- मूँगा मरतकम्- पन्ना माणिक्यम्- चुन्नी मौक्तिकम्- मोती यशदम्- जस्ता रजतम्- चाँदी वैदूर्यम्- लहसुनिया सीसम्- सीसा स्फटिका- फिटकरी हीरकः- हीरा |
29.वस्त्राणां नामानि – वस्त्रों के नाम | |
अंगरक्षिका- अंगरखा उनी वस्त्र - रांकवम् ओढनी - प्रच्छदपट: कंबल - कम्बल: कनात - काण्डपट:, अपटी कपड़ा - वस्त्रम्, वसनम्, चीरम् कमरबन्द - रसना, परिकर:, कटिसूत्रम् कुरता - कंचुक:, निचोल: कोट - प्रावार: गात्रमार्जनी- अंगोछा गद्दा - तूलसंतर: गलेबन्द - गलबन्धनांशुकम् चादर - शय्याच्छादनम्, प्रच्छद: जांघिया - अर्धोरुकम् जाकेट - अंगरक्षक: मोजा - पादत्राणम् रजाई - तूलिका, नीशार: रुई - कार्पास:, तूल: सलवार- स्यूतवरः साड़ी- शाटिका | जूता - उपानह तकिया - उपधानम् दरी - आस्तरणम् दुपट्टा - उत्तरीयम् धोती - अधोवस्त्रम्, धौतवस्त्रम् नाइटड्रेस - नक्तकम् नायलोन का - नवलीनकम् पगड़ी - शिरस्त्रम्, उष्णीषम् परदा - यवनिका, तिरस्करिणी, पायजामा - पादयाम: पेटीकोट - अन्तरीयम् पैंट - आप्रपदीनम् बिछौना - शैय्या ब्लाउज - कंचुलिका मरेठा (टोपी) - शिरस्त्राणम् रेशमी- कौशेयम् शेरवानी- प्रावारकम् |
30.सम्बन्ध सूचक शब्दाः | |
अग्रज: -बडा भाई अनुज:, निष्ठसहोदर: -छोटा भाई अरिः – दुश्मन आत्मजः – पुत्र आत्मजा – पुत्री आलिः – सखी आवुत्तः – बहनोई उपपतिः – जार गणिका – वेश्या जनकः – पिता जननी – माता जामाता – दामाद दूती – दूती देवर: -देवर ननान्दृ (ननान्दा) -ननद नप्तृ (नप्ता) -नाती पति: -पति पितामह: -दादा पितामही -दादी पितृव्यपुत्र: -चचेरा भाई पितृव्य: -चाचा पितृव्यपत्नी -चाची प्रपौत्र:, प्रपौत्री -पतोतरा (तरी) परिचारिका -नौकरानी | प्रपितामह: -परदादा पौत्री -पोती पितृष्वसृ (पितृष्वसा) -फूआ पितृष्वसृपति: -फूफा पैतृष्वस्रीय: -फुफेरा भाई बन्धुः – रिश्तेदार भागिनेयः – भानजा भृत्यः – नौकर भ्रात्रीयः – भतीजा भातृसुता – भतीजी मातामह: -नाना मातामही -नानी मातुलः – माना मातुली – मामी मातृष्वसृपति: -मौसा - मातृष्वस्रीय: -मौसेरा भाई मातृष्वसृ -मौसी यातृ- देवरानी योषितः – स्त्री वयस्यः – मित्र विश्वस्ता – रण्डा वृद्धप्रपितामहः – वृद्धपरनाना श्यालः – साला श्वश्रूः – सास |
31.सैन्यवर्ग | |
अग्निचूर्णम- बारूद आग्नेयास्त्रम्- बम आग्नेयास्त्रक्षेपः- बम फेंकना एकपरिधानम्- एकवेष, यूनिफार्म गुलिका- गोली जलपरमाण्वस्त्रम्- हाइड्रोजन बम जलान्तरिपोतः- पनडुब्बी धूमास्रम्- टीयर गैस नौसेनाध्यक्षः- जलसेनापति पदातिः- पैदल सेना परमाण्वस्त्रम्- एटम बम पोतः- पोत | भुशुण्डिः- बन्दूक भूसेनाध्यक्षः- भू-सेनापति युद्धपोतः- लड़ाई का जहाज युद्ध विमानम्- लड़ाई का विमान रक्षिन्- सिपाही लघुभुशुण्डिः- पिस्तौल वायुसेनाध्यक्षः- वायुसेनापति विमानम् – विमान शतघन्नी- तोप शिरस्त्रम्- लोहे का टोप सैनिकः- फौजी आदमी सैन्यवेषः- वर्दी |
32.सर्वनाम वर्ग | |
अत्र---यहाँ, तत्र--वहाँ, कुत्र--कहाँ, यत्र--जहाँ, अन्यत्र---दूसरी जगह, सर्वत्र---सब जगह, उभयत्र---दोनों जगह अत्रैव---यहीं पर, तत्रैव---वहीं पर, यावत्---जितना, तावत्---उतना, एतावत्, (इयत्)---इतना, कियत्--कितना, इतः---यहाँ से, | ततः--वहाँ से, कुतः--कहाँ से, यतः--जहाँ से, इतस्ततः---इधर-उधर, सर्वतः---सब ओर से, उभयतः--दोनों ओर से, कुत्रापि---कहीं भी, तत्रापि – उसमें भी यत्र-कुत्रापि---जहाँ कहीं भी, कुतश्चित्---कहीं से, कदाचित्---कभी, क्व--कब, क्वापि--कभी भी, तदा, तदानीम्---तब, उस समय, |
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